वो झूठे से सपनें मेरे ,सच्ची कहानियां
भूल गऐ हम ,चलते चलते...
वो पेड़ों पे चढ़ना, गिरकर संभलना
वो मिट्टी में खेलना ,वो कसमें
वो बारीश में भीगना ,कस्तियांं बनाना
वो पेड़ों की छांंव और पंछी सी बातें
वो ठंडी हवा
वो नदियों की छल छल,वो बचपन की यादें
भूल गऐ हम ,चलते चलते...
वो कड़ी धूप में निकलना ,तितली पकड़ना
वो चांद के साथ चलना ,तारों की गिनती करना
भूल गऐ हम ,चलते चलते..
केके यादव
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