विज्ञापन

डिप्रेशन

Khushi Maan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शायद कुछ साल पहले ये शब्द सुनने को भी नहीं मिलता था
        
                                                    
                            
पर आज कल ये सुनना आम हो गया
वो भी डिप्रेशन में है जिसका पुरा सारा काम हो गया
डिप्रेशन बच्चे से लेकर बडो तक फैला है
सब कुछ होते हुए भी इनसान अकेला है आखिर फिर क्यों ये इतना मेला है
अपनो के बीच भी अगर अकेला है
आखिर वजह क्या है कोई तो कारण होगा
इस समस्या का कोई तो निवार्ण होगा
सब के बीच पैसे की होड़ लगी है
किसी के पास कार तो किसी के पास म़ँहगी घड़ी है
कोई काम में वयस्त है तो किसी का जीवन अस्त है
कोई खाना मैं नखरे दिखाता है
तो किसी को खाना भी नहीं मिल पाता है
कोई शराब पर पैसा बहाते हैं
तो बहुत सारे पानी के बिना ही सो जाते हैं
लेकिन फिर भी ये लोग कुछ ना होते हुए भी खुश रह पाते हैं
सबको अपना बताते हैं
लेकिन पैसे वाले सब होते हुए भी डिप्रेशन से मर जाते हैं क्योंकि वो अपनी समस्या शायद घर वालो को नहीं बता पाते हैं
परिवार के साथ रिस्ता बनाओ ऐसे फिके पड जाए जिसके सामने पैसे
जिंदगी काटनी नहीं जिना सिखो
आखिर क्यों है इतनी असमानता
आपसे करती हुँ मैं एक सवाल
क्यों है जिंदगी में ये बवाल
सब होते हुए भी आप क्यों हो परेशान
अपने बडो़ को दो सम्मान , कभी करो बिना मतलब के दान
फिर देखना कोई भी नहीं होगा परेशान

- खुशी......
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Kumar

4215 कविताएं

View Profile

Sanjay Nirala

42 कविताएं

View Profile

Nema Ram

141 कविताएं

View Profile