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उदित प्रभाकर

kavyanshi srivastava

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            प्रत्यूष स्पर्श
        
                                                    
                            
नभ निखर उठा
उदित सूर्य

ऊषा की लाली
आशा से भरी हुई
विजेता मन

नव दिवस
सुनहरा प्रभात
कलरव है


पूर्ण  स्वप्न है
मगन गगन भी
नयन तृप्त

नभ को देखा
प्रभाकर उदित
कामना पूर्ण

मधुप गूंजे
रात्रि बीत चुकी है
जीवन चक्र ।

 
8 घंटे पहले
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