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उदित प्रभाकर

                
                                                         
                            प्रत्यूष स्पर्श
                                                                 
                            
नभ निखर उठा
उदित सूर्य

ऊषा की लाली
आशा से भरी हुई
विजेता मन

नव दिवस
सुनहरा प्रभात
कलरव है


पूर्ण  स्वप्न है
मगन गगन भी
नयन तृप्त

नभ को देखा
प्रभाकर उदित
कामना पूर्ण

मधुप गूंजे
रात्रि बीत चुकी है
जीवन चक्र ।

 
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2 घंटे पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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