अदभुत अविचल अचरज भरी, कैसी है ये जिंदगी
कभीं हसायें कभी रूलाये, कैसी है ये जिंदगी
जो ख़ुश हम दिल से चाहे , वो हाथों से फिसली जाए
अदभुत अविचल अचरज भरी कैसी है जिंदगी....
कभी ,तो आँख भर आये ,कभी आसमानो पर उड़ाए
ख़ुशी मिले कभी ऐसी ,कभी जो हम करना न चाँहे
हमसे ए वो भी करवाए ,कैसी है जिंदगी
अदभुत अविचल अचरज भरी कैसी है ए पेहलि
कभी हमें कोई राह दिखाए ,ऐसा जब हम दिल से चाहे
पर ना जानें क्यों ए दुःख के बादल , फीर लहराए
कैसी है जिंदगी
अदभुत अविचल अचरज भरी कैसी है जिंदगी
धीरज रख ए कहना ,चाहे कैसी है जिंदगी
अदभुत अविचल अचरज ,भरी कैसी है जिंदगी
वारे- वारे जिंदगी ,गम हमारे खत्म ना होये
फीर भी हमसे तू कहती जाए ,जीना है तुझे जी के दिखा
हर परीक्षा पार कर जा तू , कहती हमसे तू जाए ऐसी है
जिंदगी
अदभुत अविचल अचरज भरी कैसी है जिंदगी
क्यु मुझको ए समझ ना ,आये कैसी है पहेली
अदभुत अविचल अचरज भरी , कैसी है ए जिंदगी
धन्यवाद
कविता यादव (,भोपाल म.प्र)
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