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रोहिंग्या

Kavi Devanand

Mere Alfaz
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                            समग्र विश्व में पनाह ना
        
                                                    
                            
मिले कहीं जब
आते हैं सब म्हारो देश
मानते हैं
अतिथि को भगवान
ऐसी परंपरा का धनी है
मेरा देश।

हर वक्त
हर घड़ी
हर पल
मिलेगा खुला
दरवाजा
मेरे देश का।

पर मजबूर है
इस बार हम
लिया है सबक
बीती बातों से
क्योंकि ................
हर बार उठाया है फायदा

हमारे मेहमान नवाजी का
हमारे दरियादिली का
हजारों बार
बदले में देकर धोखा
सैकड़ों बार
"माना कि जिम्मेदार
नहीं तुम"

पर जो ये
हालात बने हैं
उन सैकड़ों धोखों
के घाव ने हमें
पत्थर दिल ऐसे बनाएं हैं ।

- देवानंद 

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9 वर्ष पहले
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