मेरी भक्ति की शक्ति
भले ही आज ये भक्ति निरर्थक प्रतीत होती हो,
भले ही आज मैं विजयी नहीं,
भले ही आज मेरी कोई पहचान नहीं,
पर एक दिन,
जो नेत्र उदास होकर आज जल से भरे हैं,
वो कल हर्षोल्लास से भरे होंगे।
एक दिन मेरा अस्तित्व होगा,
मेरी पहचान होगी,
किसी किताब में न सही तो,
मेरे मन में मेरे गर्व की ठाठ होगी।
एक दिन ये भक्ति की शक्ति भी रंग लाएगी,
एक दिन मेरे कृष्ण मेरे सारथी बन
खुद मुझे सफलता की दहलीज़ तक पहुँचाएँगे।
तब न मन में कोई उलझन होगी,
न मेरी भक्ति पर संदेह।
न मेरी क्षमता और मेरे विवेक पर कोई प्रश्नचिह्न।
तब सिर्फ मेरी सफलता का उत्सव होगा,
मेरे कृष्ण और मेरे अलौकिक बंधन की गाँठ और मजबूत होगी,
जिसे न कोई कभी तोड़ पाएगा।
तब मेरा अपना सफर होगा,
अपना घर होगा,
अपने निर्णय और अपने नियम होंगे।
तब मैं—“मैं” होऊँगी,
और मेरे प्रियतम।