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अहंकार का अंत हुआ

कौशलेंद्र

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वह खड़ा था
        
                                                    
                            
तुम्हारी तरह
अकड़ता हुआ
अड़ा था
हर किसी की राह में
फिर एक दिन पसर गया
भरभराकर ढह गया
तुमने कहा
भूस्खलन हुआ
हमने कहा
अहंकार का अंत हुआ
सुना तुमने!
वर्जित है
अति
सर्वत्र ।
2 घंटे पहले
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