विज्ञापन

हाँ! तुम्हारी मृत्यु की पदचाप

कौशलेंद्र

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हमने प्रदर्शन किया
        
                                                    
                            
तुमने बलप्रयोग किया
हमने प्रश्न पूछा
तुमने थप्पड़ मारा
हमने तुम्हें राजसिंहासन दिया
तुमने हमें कारा में डाला।
राजसिंहासन पर बैठकर
तुम दलित हो गये
हमें कुचलकर
तुम पीड़ित हो गये!

इतने दरिद्र हो तुम!
प्रश्न का उत्तर नहीं दे सकते!
विश्वगुरु के पास
इतनी बौद्धिक दरिद्रता!
प्रकृति को संपन्नता प्रिय है
तुम्हारी विपन्नता नहीं।
सुनो!
तुम मरने वाले हो
हाँ! तुम्हारी मृत्यु की पदचाप
गूँज उठी है
दिगदिगंत में।
एक दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7573 कविताएं

View Profile