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कविता ही मेरी भाषा है

Journalist &

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कविता गीत सिखाती है,
        
                                                    
                            
कविता ही मीत सिखाती है।
नवसृजन राष्ट्र के जनहित में
कविता ही जीत सिखाती है।

कविता ही है अंधरो में
जो जग उजियारा करता है,
कविता ही गूंगे गरीबों की
आवाज बन जाया करता है।

कविता ही वो अमीय है जो
जनप्रान बन जाया करता है,
मंदिर गिरजा गुरूद्वारे में
जनगान बन जाया करता है।

ये मीरा कविरा की बानी है ,
ग़ालिब खुसरो की निशानी है।
आदि अंत का छोर नहीं,
हर वीर की यही कहानी है।।
हर कवि की यही निशानी है....

हर युग का यही संगीत रहा,
हर रस में इसका गीत रहा।
जल थल नभ पाताल हो या,
हर क्षय में इसका जीत रहा।।
यही अमरत्व गान संगीत रहा.....
यही प्रम भक्ति संगीत रहा.....

कविता ही मेरी भाषा है,
यह अमिट सरस परिभाषा है।
मैं जो भी हूँ बस इससे हूँ,
यह जीत ही मेरी जिज्ञासा है।
कविधर्म ही मेरी परिभाषा है.....
एक वर्ष पहले
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