जा संदेशा तू ले जा
मेरे घर को दे तू पहुँचा ।
इस बार की होली
मैं अपनो के संग नहीं मना सकता।
खत मेरी माँ को देना
मेरी ओर से प्रणाम केहना ।
बस इतना सा तु कर आ
जा संदेशा.... ...........
खत जब वो देखेगी
आँखों से आंसू की धार बहेगी।
थोड़ा गुस्सा मुझपे करेगी
फिर वो मेरे फर्ज को समझेगी।
माँ जो गुजिया बनाई होगी
वो तुझको देगी खिला।
जा संदेशा ......................
पापा जब खत पढे़ंगे
सीना चौडा़ अपना करेंगे।
मेरा वीर बेटा हैं वो ये कहेंगे
अपने हाथों से तेरे शीश को देंगें सहला ।
जा संदेशा....................................
बहन जब खत देखेगी
थोड़ा सा वो रुठ जाएगी ।
फिर समझ के मेरे दर्द
भाईया कहकर तुझे लेगी बुला।
जा संदेशा.............. ...........
भाई जब खत पढे़गा
पापा से शिकायत करेगा ।
इस बार भी नहीं आये भाईया
गुस्से से लेगा मुँह फुला।
फिर याद करके मुझे
तुझे लेगा गले से लगा।
जा संदेशा...............
दादा-दादी जब खत पढे़गें
रो-रोकर बुरा हाल कर लेंगे।
कैसे बचपन में मैंने दादू की धोती थी भिंगाई
दादी सुनाएगी तुझे मेरे बचपन की कहानी।
तुझपर देंगें वो अपने प्यार बरसा ।
जा संदेशा .....................................
झिलमिल यादव
गिरिडीह (झारखण्ड)
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