इक फ़क़ीर मस्तमौला, मिज़ाज़ है बिंदास
चाह न जमीं जर जोरू, न भगवा है लिबास।
भोजन में न हरी साग, न मछली न ही मांस
आवश्यकता नहीं कुछ है प्रभु उसके पास।
दिखावा न रंग न रूप, बस तन पे है सांस
त्याग दिया मोह माया, है ज्ञान की प्यास।
- जयंत पटेल
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