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मॉं भी इंसान है

Jaya Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मॉं को देते सब भगवान का दर्जा ,
        
                                                    
                            
लेकिन, मॉं भी आखिर होती इंसान ।
गलतियॉं होती हैं उससे भी ,
कभी अनजाने में कभी नादानी में ,
करती है मॉं भी गलती ।

ऐसी कोई मॉं नहीं ,
जिसने कभी ना की हो , गलती ।
फिर भी नहीं रखती चाह ,
बच्चों के अहित का ।

बेटा हो या बेटी , आज की मॉं
करती दोनों को स्नेह ।
रिश्ता मॉं का बच्चों से ऐसा ,
टूट ना पाए , चाहे लगे कितनी ठेस ।

माँ संभालती है बच्चों को ,
हर संकट से रक्षा करती ,
खुद कितनी भी चिंता में हो ,
बच्चों की चिंता पहले करती ।

मॉं को जैसे भान होता ,
बच्चों के संकट का ,
वैसे, बच्चों को भान होता ,
मॉं के दुःख का ।

बेटा - बेटी में अंतर सिर्फ इतना ,
बेटी, जिसको कभी मॉं थी सिखाती ,
अब मॉं को, वह है सिखाती ,
दुनियादारी की समझ भी बताती ।

लेकिन मॉं ने देखी है दुनिया ज्यादा ,
परख उसे भी है इंसानों की ।।
एक महीने पहले
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