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कर्म की लिखावट

Jagdish Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अर्थ कैसा भी हो, खुशी अर्थ से नहीं,
        
                                                    
                            
खुशी तो आती है, मजबूत मन से ही।
खुद से प्यार करो, गर्व करो कर्म पर,
गलती भी गर्व है, कोशिश के धर्म पर।

मीठे-मीठे बोल हैं, नीयत में झोल है,
साहब ये दुनिया गोल है, सबके डबल रोल हैं।
जीवन कोरा कागज, कलम नहीं लिखती,
कर्म की स्याही ही, किस्मत को लिखती।

एक जीभ ही थी, जिसमें आलस न था,
मोबाइल आया हाथ में, वो भी मौन हो गया।
रिश्ते वादों शर्तों के, मोहताज नहीं होते,
दो सच्चे लोग चाहिए, जो निभाना जानते।

एक निभा सके, दूजा समझ सके,
तभी तो रिश्ते, उम्र भर चल सके।
अहंकार की मुट्ठी से, सुख नहीं बंधता,
समर्पण की अंजुली से, जहान जीतता।

बाँधोगे मुट्ठी तो, सुख फिसलेगा,
खोलोगे अंजुली तो, सब मिल जाएगा।
विजेता बनो पर, समर्पण से बनो,
झुक कर ही देखो, सबसे ऊँचा बनो।

सब खुश हैं तुमसे, तो समझौता किया है,
तुम खुश हो सबसे, तो नजरअंदाज किया है।
हर गलती को गिनोगे, तो रिश्ता टूटेगा,
माफ करना सीखोगे, तो मन जुड़ेगा।
- जगदीश प्रसाद शर्मा
2 घंटे पहले
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