"हर सुबह एक खाली पृष्ठ है"
हर सुबह साथ, नया अवसर लाती है,
कुछ सोचो, सीखो, रचो, कह जाती है।
सपना देखना ही, काफी नहीं होता,
बिना कर्म के तो, वो सपना ही सोता।
साहस चाहिए, संकल्प चाहिए,
कदम-कदम पर, विकल्प चाहिए।
राहें सरल कभी, कठिन कभी होंगे,
पर कलम वाले कभी, नहीं थकते होंगे।
साहित्यकार का दिन, खाली पन्ना है,
तुम क्या लिखते हो, वही तो गहना है।
तुम्हारी सोच ही, पहचान तुम्हारी,
तुम्हारी लेखनी ही, है शान तुम्हारी।
संकल्प लो आज, कुछ ऐसा लिखेंगे,
बुझे दिलों में, आशा भर देंगे।
किसी चेहरे पर, मुस्कान लाएँगे,
दुखी हृदय को, सहारा दिलाएँगे।
इच्छा को अब, कर्म बनाओ,
मन के भावों को, शब्द सजाओ।
प्रतिभा को अपने, भीतर न रखो,
समाज के हित में, उसको परखो।
साहित्य सजावट, शब्दों की नहीं है,
ये तो वो लौ है, जो दिलों में जली है।
संवेदना हो लेखनी, दृष्टि में आशा हो,
कर्म में निरंतरता, यही सच्ची भाषा हो।
बीते कल का बोझ, अब साथ न लाओ,
उससे जो सीखा, बस उसे अपनाओ।
जो अधूरा है, उसे आज पूरा करो,
जो अच्छा है, उसे और खरा करो।
कलम चलती रहे, विचार खिलते रहें,
भावों की नदियाँ, नित बहती रहें।
साहित्य से ही, मानवता का दीप जले,
हर मन में उजियारा, हर दिल में पले।
- जगदीश प्रसाद शर्मा