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चल जिंदगी, फिर से नई शुरुआत कहो।

Jagdish Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            "फिर से नई शुरुआत"
        
                                                    
                            

जो होना है जीवन में, वो तो होगा ही,
हँसना छोड़ के क्यों खुद को खोना ही।
हम खुद ही तो नकारात्मकता बोते हैं,
रो कर ब्रह्माण्ड को उदास करते हैं।

हँसते रहो तो मुश्किल भी आसान है,
लगाव रखो तो हर पल में सम्मान है।
बाकी सब परेशान हैं इस जहान में,
कोई सच से, कोई सच के गुमान में।

किस्मत को आजमा के जो थक गए हो,
कभी खुद को भी जरा आजमा के देखो।
नतीजे बेहतर होंगे, खुद पर यकीन करो,
जो हो वही रहो, जो महसूस करो वही कहो।

जो बुरा मानते हैं, वो मायने नहीं रखते,
जो मायने रखते हैं, वो बुरा नहीं मानते।
सुबह उठो और खुद से ये बात कहो,
चल जिंदगी, फिर से नई शुरुआत कहो।

उम्मीद जो दूसरों से की थी, खुद से करो,
स्वार्थ के लिए साथ न छोड़ो, साथ के लिए स्वार्थ छोड़ो।
- जगदीश प्रसाद शर्मा
8 घंटे पहले
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