आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

चल जिंदगी, फिर से नई शुरुआत कहो।

                
                                                         
                            "फिर से नई शुरुआत"
                                                                 
                            

जो होना है जीवन में, वो तो होगा ही,
हँसना छोड़ के क्यों खुद को खोना ही।
हम खुद ही तो नकारात्मकता बोते हैं,
रो कर ब्रह्माण्ड को उदास करते हैं।

हँसते रहो तो मुश्किल भी आसान है,
लगाव रखो तो हर पल में सम्मान है।
बाकी सब परेशान हैं इस जहान में,
कोई सच से, कोई सच के गुमान में।

किस्मत को आजमा के जो थक गए हो,
कभी खुद को भी जरा आजमा के देखो।
नतीजे बेहतर होंगे, खुद पर यकीन करो,
जो हो वही रहो, जो महसूस करो वही कहो।

जो बुरा मानते हैं, वो मायने नहीं रखते,
जो मायने रखते हैं, वो बुरा नहीं मानते।
सुबह उठो और खुद से ये बात कहो,
चल जिंदगी, फिर से नई शुरुआत कहो।

उम्मीद जो दूसरों से की थी, खुद से करो,
स्वार्थ के लिए साथ न छोड़ो, साथ के लिए स्वार्थ छोड़ो।
- जगदीश प्रसाद शर्मा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 hours ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर