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नयी उमंग का जादू जगा

Jagdish kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उमंग है ऊँचाइयों की एक पहचान,
        
                                                    
                            
गंभीर हैं हालात, फिर भी दिल में है एक अरमान।
लाता हूँ खुशियाँ, कमाता हूँ घर का राज,
संघर्षों के बीच भी रखता हूँ उम्मीदों का साज।

कभी उजाला है, कभी घनी रात,
फिर भी नहीं छोड़ता मैं अपने कदमों का साथ।
मैं हूँ एक दीपक, अँधेरों में करता हूँ प्रकाश,
गिरता हूँ, संभलता हूँ, यही है जीवन का विश्वास।

ऊँचाइयों का राज समझने चला हूँ,
हर ठोकर से कुछ नया सीखने चला हूँ।
कभी लगा कि हार गया हूँ अपने हालात से,
मुड़कर देखा तो हौसला मिला अपने ही जज़्बात से।

फिर उठकर चला नई उमंग के साथ,
मुश्किलों को छोड़कर थामा उम्मीदों का हाथ।

गिरा पत्ता, गिरी डाली,
पेड़ रह गया जैसे सूना और खाली।
लगा कि ज़माना भी है ख़फ़ा हमसे,
फिर भी एक चाहत थी दिल में सबसे।

चला मैं फिर नई उमंग के साथ,
नहीं रुका किसी मुश्किल के बाद।
समय बदला, बदली जीवन की चाल,
सूनी डाली पर फिर आया हरियाली का कमाल।

पत्ते निकले, डाली निकली,
पेड़ बना फिर अपनी पहचान।
जिसे समझा था अंत कभी,
वही बन गया नई शुरुआत का प्रमाण।

यही है मेरी कहानी,
गिरकर फिर उठने की निशानी।
उलझनों के बीच चमकता चाँद,
अँधेरों में उम्मीद की सौगात।

जीवन चाहे जितनी बार गिराए,
उमंग फिर हमें उठना सिखाए।
हार नहीं, हर ठोकर एक नया संदेश है,
उम्मीद के साथ चलना ही जीवन का विशेष है।

यह है मेरी कहानी—
उमंग मेरी पहचान,
संघर्ष मेरी राह,
और सफलता मेरा अरमान।
-जगदीश कुमार 
एक घंटा पहले
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