अगर उस पर भरोसा है तो न दुनियां से डर बंदे।
मुसीबत में अगर उलझे तो फ़िर फरियाद कर बंदे ।।
ज़माने की मुहब्बत तो बनावट है एक धोखा है।
तुझे जो इश्क़ करना है तो फ़िर उस रब पर मर बंदे ।।
तुझे कुछ दे नहीं सकते ये बहते हुए दरियां।
अगर मोती ही लेने है समंदर में उतर बंदे ।।
इबादत कर नहीं सकता तो थोड़ी बंदगी कर लें।
तेरी मांगी दुआओं में खुद आयेगा असर बंदे ।।
जो उसकी राह पर आए उसे वो आजमाता हैं।
बहुत आसाँ नहीं है सोच ले उसकी डगर बंदे ।।
वो महलों में नहीं टूटे हुए हर दिल में रहता हैं।
ग़मों की और दर्दों की न कर बिल्कुल फ़िकर बंदे ।।
ज़माने भर की"मेंहदी"मुश्किलें आसान हो जाएं
झुकाते ही कहां है उसके आगे अपना सर बंदे ।।
-इक़बाल मेंहदी काजमी