झूठ बोलते हैं ऐसे कि , सच्चा लगता है ।
खेल तुम्हारा समझ रही हूं, खेल तुम्हारा कच्चा लगता है ।
महीनो बाद हंसी हूं, तो लगता है ,
हंसकर अच्छा लगता है ।
कोई साथ चला हो तो , सफर अच्छा लगता है ,
अकेले का सफर , बस रस्ता लगता है ।
दुश्मन का भी हो तो , प्यार करूं मैं ,
मुझको बच्चा बस बच्चा लगता है ।
शूल - सुमन जो भी मिले हैं ,
मुझको सब , अपना रस्ता लगता है ।
उसकी पूजा करके , मांगू कुछ तो ,
मुझको ये सौदा , सस्ता लगता है ।
खुशियां- दुख , वो जो भी देते हैं ,
मुझको सब अपना - अपना लगता है ।