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अपनी हैसियत के , सपने चुन रही हूं मैं।।

Ipsita Bhadauria

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सपनों को आँखों मे , ऐसे बुन रही हूं मैं ,
        
                                                    
                            
जैसे बिन ऊन के , स्वेटर बुन रही हूं मै।
सपने टूटने का डर , अब मुझे नही सताता ,
अपनी हैसियत के , सपने चुन रही हूं मैं।।
3 घंटे पहले
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