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जस बान चलैं तस बूँद गिरैं

Indra Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जस बान चलैं तस बूँद गिरैं पर घाव नहीं तन पै मन पै।
        
                                                    
                            
उफनाय रहे सब खेत चढ़ै जल वेग बहै बढ़ि मेड़न पै।
लहराय रहे सब धानन के तन भाव उमंगन का पनपै।
त्रयताप मिटे वसुधा बिहँसी जब नीर परा सबके तन पै।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'
7 घंटे पहले
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