विज्ञापन

बरखा गई है आई शरद परव लेके

Indra Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बरखा गई है आई शरद परव लेके, नर-नारी बाल-वृद्ध में चढ़ी उमंग है।
        
                                                    
                            
पुरखों को जल देके माई के स्वरूप पूजे, दशहरा ने जगाई भक्ति अंग अंग है।
उल्लुओं का पूजन दीपावली गोवरधन, भाईदूज को मनाया खुशियों के संग है।
बुड़की के मेला तक सब हैं संगीन हुए, श्वान सिरों तक पे चढ़ा हुआ अनंग है।
-इन्द्र प्रसाद लोधी 'रत्नेश'
8 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Kiran Mishra

232 कविताएं

View Profile

Anil Pandey

505 कविताएं

View Profile