दोहा रोला कुंडलिया, छंद गीत हुंडलिया, मुक्तक सवैया सब काव्य के ही रूप हैं।
गजल सवैया व चौपाई सुर लय ताल, गणों से संयुक्त हो के बनते अनूप हैं।
जीवनी कहानी लघु कथा आदि आदि सब, भाव रस से भरे साहित्य वाले कूप हैं।
सार सार गह कर थोथे को उड़ाने वाले, कवि गद्यकारों के बनाए सभी सूप हैं।
-इन्द्र प्रसाद लोधी 'रत्नेश'