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करता प्रणाम सिंह शावक भगत को मैं

Indra Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            करता प्रणाम सिंह शावक भगत को मैं, बाल्यकाल में बँदूकें खेतों में जो बोते थे।
        
                                                    
                            
मातु भारती की बेड़ियों को देख करके जो, हृदय द्रवित कर छुप छुप रोते थे।
लाला लाजपत राय हत्या का ले प्रतिशोध, फेंका बम असेंबली में गोरे नींद सोते थे।
तेइस बरस आयु जीकर के फाँसी चढ़े, जिन्हें देख के कसाई नयन भिगोते थे।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'
एक दिन पहले
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