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एक कदम स्वच्छता की ओर

Indira Kumari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कदम कदम को जोर अगर हम
        
                                                    
                            
शपथ लें आज सवेरे
मिलजुलकर हम स्वच्छ करेंगे
होंगे स्वस्थ सवेरे।

प्रकृति बनी है पेड़ पौध से
कोई न इसको छेड़े
सुरक्षित होगा पर्यावरण हमारा
अगर हो हरे घनेरे ।

मूल्यवान है जीवन मेरा
इसपर न पानी फेरें
स्वच्छ करें हम बाग बगीचा
नदिया नाल के तीरे ।

गंदगी को हम दूर भगाएँ
लगाएँ झाड़ू फेरे
स्वच्छ कर्म में शर्म नहीं है
अगर   समझे' कर्म हैं मेरे ।

असल गंदगी भेदभाव है
परें न इसके फेरे
जात पात के नीच सोच को
कर दें दर किनारे ।

तन से कोई जात न पाता
है यह मन के फेरे
स्वच्छ कर्म कर स्वच्छ बनें हम
स्वच्छ जात हों मेरे।


 
3 घंटे पहले
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