आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

एक कदम स्वच्छता की ओर

                
                                                         
                            कदम कदम को जोर अगर हम
                                                                 
                            
शपथ लें आज सवेरे
मिलजुलकर हम स्वच्छ करेंगे
होंगे स्वस्थ सवेरे।

प्रकृति बनी है पेड़ पौध से
कोई न इसको छेड़े
सुरक्षित होगा पर्यावरण हमारा
अगर हो हरे घनेरे ।

मूल्यवान है जीवन मेरा
इसपर न पानी फेरें
स्वच्छ करें हम बाग बगीचा
नदिया नाल के तीरे ।

गंदगी को हम दूर भगाएँ
लगाएँ झाड़ू फेरे
स्वच्छ कर्म में शर्म नहीं है
अगर   समझे' कर्म हैं मेरे ।

असल गंदगी भेदभाव है
परें न इसके फेरे
जात पात के नीच सोच को
कर दें दर किनारे ।

तन से कोई जात न पाता
है यह मन के फेरे
स्वच्छ कर्म कर स्वच्छ बनें हम
स्वच्छ जात हों मेरे।


 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
56 minutes ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर