हर महीने तनख्वा जो आती है,
मुझे देख तकती है ओर मैं उसे देख
पास महंगाई जी चुराती है,
मानो GST के गले,
वरमाला पहन चिढ़ाती है
लो ताता लग गए खर्चों का
UPI online, Bachchan ji की आवाज सुना रही है
और IMPS, NEFT, RTGS, लोन के EMI भुना रही है
किसका पहले, किसका बाद में
कतार में प्राथमिकता,
चंचल आहट निद्रा भगा रही है
लेनदार अनेक, देनदार फाका
पड़ोसी दोस्तों से उधारी में,
रिश्तों में दरारों ने झांका
अगला पिछला कौन है
मुसीबत में जो कर दे,
टाट के पैबंद को, उजड़ने से ढाका
हाय रि किस्मत,
अब तो बची कुची जेब भी,
जेबकतरों ने लुटा जमकर
बटुआ को ही कर दी, रिश्वत में डाका
इसीलिए तनख्वा भी, ९ २ ११ बोलकर
अगले महीने फिर आऊंगी,
ये दिलासा दे, दे भगा.