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हिंदी मेरी जान, वतन है मेरा हिंदुस्तान

सर्जन शीतल

Mere Alfaz
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                            हिंदी मेरी जान वतन है मेरा हिंदुस्तान।
        
                                                    
                            
दुनियां वालो तुम्हें बतादूं मैं अपनी पहचान।।

तीन रंग से बना तिरंगा जो नभ में लहराये।
रंग केसरिया त्याग समर्पण का संदेश सुनाये।।

श्वेत रंग सिखलाता हमको शान्ति स्वच्छता रखना।
हरा रंग हरियाली रखना और संम्पन्न बनाये।।

अशोक चक्र की चौबीस तीली समझा रही विधान।
हिंदी मेरी जान वतन है मेरा हिंदुस्तान।।

जहां नित्य घर - घर में उठकर पूजी जाती गीता।
राधा कृष्ण बसे हर दिल में संग राम और सीता।।

गंगा यमुना सरस्वती में बहता निर्मल अमृत।
तर जाता है हर पापी जो गंगा जल को पीता।।

राम सिया को सीने में लेकर फिरते हनुमान।
हिंदी मेरी जान वतन है मेरा हिंदुस्तान।।

वीर शिवाजी सावरकर का नाम बड़ा अलबेला।
जलियां वाले बाग में शेखर खूनी होली खेला।।

खूब लड़ी मर्दानी थी वह रानी लक्ष्मीबाई।
डायर से बदला लेने को ऊधम गया अकेला।।

युगों-युगों से रहा हमारा भारत देश महान।
हिंदी मेरी जान वतन है मेरा हिंदुस्तान।।

-सर्जन शीतल
8 वर्ष पहले
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