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सब ले गया वो शख़्स तेरा शहर छोड़ के।

HIMANSHU CHARAN

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            यह कौन जा रहा है मेरा गाँव छोड़ के,
        
                                                    
                            
आँखों ने रख दिए हैं समंदर निचोड़ के।

हमसे न पूछ रात की खामोशियों का दुख,
सोए हैं अपने ज़ख्म बिछाने ओढ़ के।

साए भी आज अपने मकाँ ढूँढने लगे,
दीवार रो पड़ी है पुराना मकाँ तोड़ के।

मिलना अगर न हो तो कोई बात भी नहीं,
बस याद रखना मुझको कभी अपना सोच के।

लाला' तमाम शहर में अब ढूंढता है क्या,
सब ले गया वो शख़्स तेरा शहर छोड़ के।
एक दिन पहले
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