मेघदूत, ओ मेघदूत,
सुनो मेरी पुकार।
मेघराज से कह दो तुम,
धरती पीने को तैयार।
घनघोर घटा गरज-गरज गरजे,
धरती जल को तरसे।
जीव-जंतु, खग-खरगोश,
प्यासा दीन, बेबस बेहोश।
नदी सूखी, पेड़ झड़े,
रात-दिन धरती जले।
एक ही इच्छा सबके मन में,
बरसो बनकर मेघ विशेष।