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आदमी बेकार होता जा रहा है - हरवंश हृदय

Harvansh Srivastava

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आदमी बेकार होता जा रहा है
        
                                                    
                            
बहुत लाचार होता जा रहा है

हाल मत पूछिए हृदय का
फकत बेजार होता जा रहा है

इश्क इबादत हुआ करता था
अब कारोबार होता जा रहा है

कभी घर था जो बसर के लिए
बड़ा बाजार होता जा रहा है

राज जो राज था कल तलक
आज अखबार होता जा रहा है

अंदाज हुनर सलीका रखे रहो
पैसा किरदार होता जा रहा है

जंगल मिट रहे जमीन से
आंगन अश्जार होता जा रहा है

कत्ल हो सकते हो कभी भी
हुस्न हथियार होता जा रहा है

- हरवंश हृदय
बांदा
2 वर्ष पहले
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dev sachdeva

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