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‘हर्षित’ रहो सदा यदि जीवन बने प्रेममय

Harshit Muni

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                            इतनी महंगाई में...
        
                                                    
                            
इतनी महंगाई में भी कैसे रहें प्रसन्नमय
सुनिए महापुरुषों की प्रेरणा ये अमृतमय
महंगाई, परेशानियाँ तो है धूप - छाँव की तरह,
क्यों करते हो दिल छोटा,बच्चों की तरह?
दिल छोटा कर दोगे तो तकलीफें बढ़ेंगी,
हर पल, हर स्थल चिंता सताने लगेगी।
पर जब देखोगे अपने से निम्न स्तरों वालों को,
हृदय भर आयेगा जब देखोगे अभावों में जीने वालों को।
मिला है समय तो क्यों न बनालो जीवन धर्ममय
इतनी महंगाई...
दिल इतना बड़ा बना लो, हर किसी के साथ हो प्रेम,
दुश्मन भी बन जाये दोस्त, इतना विशाल कर दो प्रेम।
बात करे कोई तुम से, दुःख उसका हल्का हो जाय,
क्यों न आओ अपना ऐसा जीवन बनायें.
फूल खिलता है वह नहीं देखता, वो क्यों बड़ा,
महक बिखेरता है वो, चाहे क्यों न हो छोटा।
आपकी बातों से निराशा नहीं,आशा झलके,
उम्मीद और प्रेम भरी बातों से मुरझाये फूल भी महके।
‘हर्षित’ रहो सदा यदि जीवन बने प्रेममय
 
2 घंटे पहले
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