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आह लब पे उठी, स्मरण हो गया।

Hariom Sonu

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अक्स खाक हुए तो दहन हो गया,
        
                                                    
                            
धार सीने बही, दर्पण हो गया।
साँस सुर में बंधी, वंदन हो गया,
आह लब पे उठी, स्मरण हो गया।

— हरिओम सोनू 
20 मिनट पहले
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