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"अमर वजूद"

Hariom Sonu

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            "अमर वजूद"
        
                                                    
                            

हमारे बाद भी तारीख़ में किरदार ज़िंदा हैं,
रग-रग के लहू में आज भी आसार ज़िंदा हैं।

चले जाएँगे तो क्या हुआ इस बज़्म-ए-दुनिया से,
हमारे नाम से ही आज भी दरबार ज़िंदा है!

 
2 घंटे पहले
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Chandra prakash

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