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अमर उजाला

Harikesh Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अमर उजाला छोटे बड़े कवियों की एक नई पहचान है
        
                                                    
                            
इंसानों से भी ज़्यादा इंसान हैं
जब हम कवियों की कल्पनाएं कराहती हैं
तब अमर उजाला की बाहें हम कवियों को मां की भांति बुलाती हैं
तुम भी लिखना , हम भी लिखेंगे
तुम भी पढ़ना,हम भी पढ़ेंगे
हे अमर उजाला!
तुम भी अमर उजाला,हम भी अमर उजाला
वो भी लिखने वाली , मैं भी लिखने वाला

हरिकेश यादव काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी


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6 वर्ष पहले
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