अमर उजाला छोटे बड़े कवियों की एक नई पहचान है
इंसानों से भी ज़्यादा इंसान हैं
जब हम कवियों की कल्पनाएं कराहती हैं
तब अमर उजाला की बाहें हम कवियों को मां की भांति बुलाती हैं
तुम भी लिखना , हम भी लिखेंगे
तुम भी पढ़ना,हम भी पढ़ेंगे
हे अमर उजाला!
तुम भी अमर उजाला,हम भी अमर उजाला
वो भी लिखने वाली , मैं भी लिखने वाला
हरिकेश यादव काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी
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