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आओ लिखें हम एक नयी कहानी

HARI RAM

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आओ लिखें हम एक नयी कहानी,
        
                                                    
                            
जिसमें न कोई राजा हो न रानी।
बस उसमें गांवों की स्वच्छ हवा हो,
और हो बूढ़े कुंए का निर्मल पानी ।
उसकी कथा वस्तु हो मंहगू ममता,
और हो उसमें गांव की बोली बानी।
हों उसमें गहरी गडही ताल तलैया,
जिसमें उगती हो तलपटनी रानी।
नदी, नाव और पनघट हों उसमें,
जिसमें पशु पक्षी की देखें मनमानी।
बातें करते कोई बुढऊ बाबा हों,
हों उसमें काका काकी मामा नानी।
हवा हो उसमें पंछुवा और पुरवाई,
और हों उसमें घाघ मौसम विज्ञानी।
हों उसमें उड़ते भूरे काले बादल,
और हो दादुर मोर चकोर की बानी ।
उछल-कूद करते बछड़े बछिया हों,
और हो मरकही गाय की रंभानी।
उसमें हरियाली हो उन पेड़ों की,
जिसके संग आयी "हरी" जवानी।
जिसमें हो खट्टे मीठे आम की खुशबू ,
आ जाए सूखे मुंह में भी पानी।
काले काले मीठे जामुन फल हों,
जिसके दाग की न हो कभी रवानी ।।
- हरी राम यादव
 
7 महीने पहले
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