आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आओ लिखें हम एक नयी कहानी

                
                                                         
                            आओ लिखें हम एक नयी कहानी,
                                                                 
                            
जिसमें न कोई राजा हो न रानी।
बस उसमें गांवों की स्वच्छ हवा हो,
और हो बूढ़े कुंए का निर्मल पानी ।
उसकी कथा वस्तु हो मंहगू ममता,
और हो उसमें गांव की बोली बानी।
हों उसमें गहरी गडही ताल तलैया,
जिसमें उगती हो तलपटनी रानी।
नदी, नाव और पनघट हों उसमें,
जिसमें पशु पक्षी की देखें मनमानी।
बातें करते कोई बुढऊ बाबा हों,
हों उसमें काका काकी मामा नानी।
हवा हो उसमें पंछुवा और पुरवाई,
और हों उसमें घाघ मौसम विज्ञानी।
हों उसमें उड़ते भूरे काले बादल,
और हो दादुर मोर चकोर की बानी ।
उछल-कूद करते बछड़े बछिया हों,
और हो मरकही गाय की रंभानी।
उसमें हरियाली हो उन पेड़ों की,
जिसके संग आयी "हरी" जवानी।
जिसमें हो खट्टे मीठे आम की खुशबू ,
आ जाए सूखे मुंह में भी पानी।
काले काले मीठे जामुन फल हों,
जिसके दाग की न हो कभी रवानी ।।
- हरी राम यादव
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
7 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर