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साथ जो है मेरे वह यादों की बारात

Gurudeen Verma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कटती नहीं है चैन से, सच मेरी रात।
        
                                                    
                            
साथ जो है मेरे, वह यादों की बारात।।
कटती नहीं है चैन से-----------------------।।

हम करीब बैठे थे, महफ़िल वह अजीब थी।
खोए हुए थे हम दूजे में, शाम वह रंगीन थी।।
तड़पाती है आज भी, उससे वह मुलाकात।
साथ जो है मेरे, वह यादों की बारात।।
कटती नहीं है चैन से------------------।।

कैसे- कैसे ख्वाब बुने थे, कसमें हमने खाई थी।
मरते दम तक साथ रहेंगे, एक हमारी राहें थी।।
जिंदा है वह आज भी, गीतों-खतों में मेरे साथ।
साथ जो है मेरे, वह यादों की बारात।।
कटती नहीं है चैन से------------------।।

देखता हूँ जिसको मैं, उसमें उसकी सूरत है।
मेरे दिल में आज भी, उसके लिए ही मोहब्बत है।।
आता है उसी का नाम, करता हूँ जब कोई बात।
साथ जो है मेरे, वह यादों की बारात।।
कटती नहीं है चैन से-------------------।।
*(स्वरचित दिनांक 22/07/2009)*


 
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