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मीठी बोली सामने, पीछे आग लगाय

Gopinath Krishna

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मीठी बोली सामने, पीछे आग लगाय ।
        
                                                    
                            
रंग बदलते देख के, गिरगिट भी शर्माय ।।
गिरगिट भी शर्माय , देखके ढोंगी जन को ।
पूजा करे दिखाय , न जाने सिमटन मन को ।।
खेती करते झूठ की , निश दिन गाल बजाय ।
ऐसे घटिया लोग से , बचके रहना भाय।।
-गोपी नाथ कृष्ण
एक घंटा पहले
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