मीठी बोली सामने, पीछे आग लगाय ।
रंग बदलते देख के, गिरगिट भी शर्माय ।।
गिरगिट भी शर्माय , देखके ढोंगी जन को ।
पूजा करे दिखाय , न जाने सिमटन मन को ।।
खेती करते झूठ की , निश दिन गाल बजाय ।
ऐसे घटिया लोग से , बचके रहना भाय।।
-गोपी नाथ कृष्ण
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