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जैसे-जैसे त्योहार नजदीक आने लगता है।

Gitesh pathak

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शाम का अंधेरा सुबह के उजाले को खाने लगता है,
        
                                                    
                            
गाँव-गली का हर मोड़ याद आने लगता है,
जैसे-जैसे त्योहार नजदीक आने लगता है।
3 घंटे पहले
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