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बे-अंत

Girish Chandra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            न आरजू है तुझे पाने की
        
                                                    
                            
बस ख़्वाहिश है तुझ में समा जाने की
तेरी रूह से मिल जाने की
तुझ में ही कहीं गुम हो कर
फिर वापस ना आने की
— डोभाल गिरीश
7 महीने पहले
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