न आरजू है तुझे पाने की
बस ख़्वाहिश है तुझ में समा जाने की
तेरी रूह से मिल जाने की
तुझ में ही कहीं गुम हो कर
फिर वापस ना आने की
— डोभाल गिरीश
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X