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वक्त के उस मोड़ पर

Gaurav Chhatrapati

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वक्त के उस मोड़ पर तुम छूट गए,
        
                                                    
                            
जहां लफ्ज़ खामोश थे और आंसू कह गए।
ना कोई शिकवा ,ना कोई गिला रहा,
बस दिल में इक सूनापन रह गया।
तेरे जाने की आहट तो थी कहीं,
यह यकीन नहीं हुआ कि तू सच में गई।
जो पल साथ गुजारे थे कभी,
अब वो ही पल सजा बन गए अभी।
तेरी हंसी की गूंज अब भी है इस घर में,
तेरे बिना सब अधूरा सा लगता है हर पहर में।
मैं हर रोज उस मोड़ पर जाता हूं,
जहां आखिरी बार तेरा हाथ थामा था।
कुछ रिश्ते मुकम्मल नहीं होते शायद,
पर अधूरे होकर भी अमर हो जाते है।
बिछड़ना अगर किस्मत थी तो मंजूर है ,
पर तुझे भुला पाना नामुमकिन जरूर है।
एक वर्ष पहले
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