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पुष्प की कहानी

Gandharv singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            फूल खिले अरु कैतिक बिखरे
        
                                                    
                            
कैतिक रहे पतंगा खाय।।
कैतिक जीवन जियो अतिसुंदर
कैतिक दीन्है गंग बहाय।।
कैतिक भेंट भये हरि चरणों
कैतिक जीवन धन्य बनाय।।
कैतिक महक गये जग माहीं
कैतिक पुहुप डाल मुरझाए।।
-गन्धर्व सिंह अहिरवार
 
2 वर्ष पहले
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