फूल खिले अरु कैतिक बिखरे
कैतिक रहे पतंगा खाय।।
कैतिक जीवन जियो अतिसुंदर
कैतिक दीन्है गंग बहाय।।
कैतिक भेंट भये हरि चरणों
कैतिक जीवन धन्य बनाय।।
कैतिक महक गये जग माहीं
कैतिक पुहुप डाल मुरझाए।।
-गन्धर्व सिंह अहिरवार
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