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स्पर्श

GAJANAN RATHOD

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तेरा आना
        
                                                    
                            

नीरव आकाश में

एक चिड़िया की तरह

और चला जाना

बिना गुनगुनाए

कोई गीत.

और मेरा खो जाना

सपनों में,

तेरे होंठो से

मेरी आत्मा तक,

उस स्पर्श के एहसास में

जो अब तलक हुआ नहीं.

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले
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