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दीवारों के पार

GAJANAN RATHOD

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लाजमी है
        
                                                    
                            

अब तुम

बारिश से

अपना दामन

बचाती होगी

लेकिन

छुप-छुप कर ही सही

अपनी सांसो को

नम यादों से

भिगाती होगी

हाँ

रिश्तों की जकड़

कैद कर सकती है

तुम्हारी देह

तुम

अपनी रूह

कभी तो

दीवारों के पार

ले जाती होगी

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7 वर्ष पहले
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